Saturday, April 7, 2012

real story

जिंदगी में हर परेशानी से लडऩे के लिए सबसे पहले इंसान को जज्बे की जरुरत होती है। जिसमें लगन होती है वह हर परिस्थिति से जीत सकता है। ऐसे ही जिंदगी जीने का जज्बा सीखाने वाली एक कहानी है, नाचे मयूरी फिल्म से पहचान बनाने वाली अदाकारा सुधा चंद्रन की। सुधा आज टेलीविजन और फिल्मी दुनिया की जानी-मानी हस्ती है। बस दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया। आप में से बहुत सारे लोगों ने उन्हें सोनी टीवी के डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' में भी देखा होगा।

नाचे मयूरी फिल्म खुद सुधा के जीवन पर आधारित थी। वे उस समय की पहली अभिनेत्री थी। जिन्होंने अपने ही जीवन पर बनी फिल्म में अभिनय किया। सुधा ने सबसे पहले अपनी पहचान एक भरतनाट्यम डांसर के तौर पर बनाई। डांस को सुधा अपना जीवन मानती थी। लेकिन 1981 में हुई एक बस दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी थी। इस दुर्घटना के कारण उनका एक पैर काटना पड़ा। इस हादसे के बाद सुधा बुरी तरह निराश हुई उन्हें लगने लगा की जैसे सब खत्म हो गया है। लेकिन जब सुधा को जयपुर के एक अस्पताल में लगने वाले कत्रिम पैर के बारे में जानकारी मिली तो। डॉक्टर से बातचीत के बाद सुधा फिर से जिंदगी जीने के जज्बे से भर गई।

मेगजीन्स में सुधा की कहानी छपने लगी। तभी जाने-माने फिल्म निर्माता रामोजी राव की नजर उनकी कहानी पर पड़ी और उन्होंने 1984 में तेलुगू में मयूरी नाम की फिल्म बना डाली। उसके  दो साल बाद ही रामोजी राव ने टी. रामाराव के निर्देशन में नाचे मयूरी हिन्दी में बनाई और फिर से डांसिंग करने की अपनी ललक और मेहनत से सुधा ने सब को अचंभित तो किया ही साथ ही इस फिल्म में अपने अभिनय से दर्शकों की आंखे भी नम कर दी।

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