Sunday, April 29, 2012

Happy birthday

aye dost ye dua hai meri
soo saal tak tu rahe ,
 rahe jamana  bahar ka

happy birth day to u
dear friend

Saturday, April 7, 2012

sukhi parivar ki neev

इस समय दो तरह के दाम्पत्य चल रहे हैं। पहला अशांत दाम्पत्य और दूसरा असंतुष्ट दाम्पत्य। जो पति-पत्नी ना समझ हैं उनके उपद्रव, खुद उनके सामने और दुनिया के आगे जाहिर हो जाते हैं। वे अपनी अशांति पर आवरण नहीं ओढ़ा पाते।



दूसरे वर्ण का दाम्पत्य वह है जिसमें पति-पत्नी थोड़े समझदार या कहें चालाक हैं, लिहाजा इस अशांति को ढंक लेते हैं, उपद्रव को खिसका भर देते हैं। ऐसा दाम्पत्य असंतुष्ट दाम्पत्य है। फिर ये असंतोष स्त्री या पुरुष दोनों को ही अपने-अपने गलत मार्ग पर जाने के लिए प्रोत्साहित कर देता है। जिन्हें सचमुच घर बसाना हो वे चमड़ी की तरह एक बात अपने से चिपका लें और वह है प्रेम।



बिना प्रेम के परिवार चलाया जा सकता है, बसाया नहीं जा सकता। इस समय ज्यादातर लोगों की गृहस्थी शोषण और उत्पीडऩ पर चल रही है। पति-पत्नी में से जो ज्यादा चालाक है वह इसे व्यवस्थित ढंग से करता है और जो कम समझदार है वह अव्यवस्थित तरीके से निपटा रहा है। मूल कृत्य में कोई अंतर नहीं है। प्रेम यदि आधार बनेगा तो जो पक्ष अधिक बुद्धिमान, समझदार होगा वह अपने जीवनसाथी को भी वैसा बनाने का प्रेमपूर्ण कृत्य करेगा। यही आपसी मुकाबला न होकर समान होने के सद्प्रयास होंगे।



गुण, कर्म और स्वभाव की समानता से जोड़े बन जाएं यह किस्मत की बात है। वरना अपनी समूची सहनशक्ति, उदारभाव और माधुर्य को अपने जीवनसाथी के साथ संबंधों में झोंक दें और इसके लिए जो ताकत लगती है उसके शक्ति संचय के लिए ये नौ दिन काम आएंगे। नामभर नवरात्र है, पर इसमें गजब का उजाला है।

real story

जिंदगी में हर परेशानी से लडऩे के लिए सबसे पहले इंसान को जज्बे की जरुरत होती है। जिसमें लगन होती है वह हर परिस्थिति से जीत सकता है। ऐसे ही जिंदगी जीने का जज्बा सीखाने वाली एक कहानी है, नाचे मयूरी फिल्म से पहचान बनाने वाली अदाकारा सुधा चंद्रन की। सुधा आज टेलीविजन और फिल्मी दुनिया की जानी-मानी हस्ती है। बस दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया। आप में से बहुत सारे लोगों ने उन्हें सोनी टीवी के डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' में भी देखा होगा।

नाचे मयूरी फिल्म खुद सुधा के जीवन पर आधारित थी। वे उस समय की पहली अभिनेत्री थी। जिन्होंने अपने ही जीवन पर बनी फिल्म में अभिनय किया। सुधा ने सबसे पहले अपनी पहचान एक भरतनाट्यम डांसर के तौर पर बनाई। डांस को सुधा अपना जीवन मानती थी। लेकिन 1981 में हुई एक बस दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी थी। इस दुर्घटना के कारण उनका एक पैर काटना पड़ा। इस हादसे के बाद सुधा बुरी तरह निराश हुई उन्हें लगने लगा की जैसे सब खत्म हो गया है। लेकिन जब सुधा को जयपुर के एक अस्पताल में लगने वाले कत्रिम पैर के बारे में जानकारी मिली तो। डॉक्टर से बातचीत के बाद सुधा फिर से जिंदगी जीने के जज्बे से भर गई।

मेगजीन्स में सुधा की कहानी छपने लगी। तभी जाने-माने फिल्म निर्माता रामोजी राव की नजर उनकी कहानी पर पड़ी और उन्होंने 1984 में तेलुगू में मयूरी नाम की फिल्म बना डाली। उसके  दो साल बाद ही रामोजी राव ने टी. रामाराव के निर्देशन में नाचे मयूरी हिन्दी में बनाई और फिर से डांसिंग करने की अपनी ललक और मेहनत से सुधा ने सब को अचंभित तो किया ही साथ ही इस फिल्म में अपने अभिनय से दर्शकों की आंखे भी नम कर दी।