Sunday, December 23, 2012
Monday, December 17, 2012
Saturday, December 8, 2012
Hindi News | Rajasthan News | Get all rajasthan News | Jaipur News | Jodhpur News | Udaipur News | Bikaner News | Rajasthan News in Hndi
जाड़े में निखारें बदन
Wednesday, 28 Nov 2012 9:54:12 hrs IST
जाड़े में शरीर की साफ-सफाई और सौन्दर्य की तरफ ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। हाथ,पैर,गाल,होंठ आदि रूखी-तीखी हवा के कारण फटे,भद्दे दिखाई देने लगते हैं। बस,थोड़े से प्रयास से आप अपना खोया रंग रूप इस तरह निखार सकते हैं...Wednesday, 28 Nov 2012 9:54:12 hrs IST
रूखी त्वचा का खुरदरापन दूर करने के लिए दो छोटे चम्मच ग्लिसरीन,आधा छोटा चम्मच नींबू का रस,एक छोटा चम्मच बादाम का तेल और एक छोटा चम्मच मलाई मिलाकर लेप बनाएं। इसे शरीर की त्वचा पर मलें। पंद्रह-20 मिनट गुनगुनी धूप में टहलें,फिर स्नान कर लें। त्वचा में कोमलता व चिकनेपन का एहसास होने लगेगा।
रूखी,फटी,बेजान त्वचा का सौन्दर्य संवारने के लिए दही और दूध को समान मात्रा में मिलाकर शरीर पर मलें और फिर गुनगुने पानी से स्नान कर लें।
जाड़े में अक्सर त्वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं,इस कारण त्वचा सही तरीके से सांस नहीं ले पाती और कुम्हलाई,सलवटेंदार नजर आने लगती है। गर्म पानी में हल्दी और थोड़ी सी फिटकरी घोलें,फिर भाप लें,त्वचा के बंद रोम छिद्र खुलने लगेंगे।
त्वचा का रूखापन दूर करने के लिए मलाई में थोडेे से दूध में घुली केसर डालकर अच्छी तरह फेंट लें। इसे त्वचा पर मलें,त्चचा चिकनी होने लगेगी।
चेहरे को चिकना बनाने के लिए पहाड़ी आलू पीसकर उसमें थोड़ा सा अनार का रस व दही मिलाकर लेप बना लें। इसे चेहरे पर मलें। 10 मिनट बाद चेहरा साफ कर लें।
इस ठंडे मौसम में त्वचा को स्निग्ध बनाए रखने के लिए स्नान के पानी में दो छोटे चम्मच सिरका मिला लें।
संतरे के छिलकों का पाउडर दो छोटे चम्मच,एक छोटा चम्मच आटा,एक छोटा चम्मच मलाई,एक छोटा चम्मच गुलाब जल और थोड़ा सा पानी मिलाकर उबटन बना लें। इसे चेहरे,गर्दन,हाथ-पैर पर मलें। कुछ देर बाद स्नान कर लें,त्वचा का सौंदर्य खिल उठेगा।
जाड़े में सांवले चेहरे का सौंदर्य निखारने के लिए शहद में गुलाब जल,पोदीना रस मिलाकर चेहरे पर मलें। पंद्रह मिनट बाद चेहरा साफ पानी से धो लें।
खट्टे संतरे के रस में समान मात्रा में शहद मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा सुकोमल होती है।
सर्दियों में खासकर हाथ-पैरों की सफाई से बेखबर न रहें। इसके लिए सप्ताह में एक बार पेडीक्योर व मैनीक्योर अवश्य करें। पैरों के नाखून को भी हमेशा काटकर ठीक आकार में रखें। इन दिनों सर्द मौसम के असर से नाखून कुछ कठोर हो जाते हैं। इसलिए उन पर नींबू व अनार का रस मलें। रात्रि में पोरों पर मलाई या कोल्ड क्रीम की मालिश करें।
सर्दियों में अंगुलियों में सूजन आ जाती है। चार छोटे चम्मच सरसों के तेल में एक छोटा चम्मच बारीक पिसा सेधा नमक मिलाकर गर्म करें तथा रात्रि में इसे अंगुलियों पर मलें। मोजे-दस्ताने पहनकर सोएं। सूजन मिट जाएगी।
यदि पैर फटने लगें तो उन्हें नमक युक्त गर्म पानी से धोकर अरंडी का तेल मलें। पैरों का फटना बंद होने लगेगा।
होठों,गालों पर गुलाबी रंगत पाने के लिए गुलाब के ताजा फूल,चिरौंजी पेस्ट और जायफल पाउडर को दूध में भिगोकर उसका पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर मलें। सूखने पर चेहरा धो लें। चेहरे पर व होठों पर गुलाबी आभा दमकने लगेगी।
चावल के आटे में दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। उबटन की तरह चेहरे पर मलें। चेहरे की त्वचा सुकोमल बनेगी।
सीताफल,संतरा,नींबू और सेब के छिलकों को पीसकर त्वचा पर मलें। त्वचा में सौंदर्य का जादू जगने लगेगा।
आटे में नारियल का तेल,चुटकी भर हल्दी,गुलाबजल,नींबू रस व पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे त्वचा पर मलें। स्नान के उपरांत रंग-रूप खिला-खिला दिखाई देगा।
Hindi News | Rajasthan News | Get all rajasthan News | Jaipur News | Jodhpur News | Udaipur News | Bikaner News | Rajasthan News in Hndi
जाड़े में निखारें बदन
Wednesday, 28 Nov 2012 9:54:12 hrs IST
जाड़े में शरीर की साफ-सफाई और सौन्दर्य की तरफ ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। हाथ,पैर,गाल,होंठ आदि रूखी-तीखी हवा के कारण फटे,भद्दे दिखाई देने लगते हैं। बस,थोड़े से प्रयास से आप अपना खोया रंग रूप इस तरह निखार सकते हैं...Wednesday, 28 Nov 2012 9:54:12 hrs IST
रूखी त्वचा का खुरदरापन दूर करने के लिए दो छोटे चम्मच ग्लिसरीन,आधा छोटा चम्मच नींबू का रस,एक छोटा चम्मच बादाम का तेल और एक छोटा चम्मच मलाई मिलाकर लेप बनाएं। इसे शरीर की त्वचा पर मलें। पंद्रह-20 मिनट गुनगुनी धूप में टहलें,फिर स्नान कर लें। त्वचा में कोमलता व चिकनेपन का एहसास होने लगेगा।
रूखी,फटी,बेजान त्वचा का सौन्दर्य संवारने के लिए दही और दूध को समान मात्रा में मिलाकर शरीर पर मलें और फिर गुनगुने पानी से स्नान कर लें।
जाड़े में अक्सर त्वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं,इस कारण त्वचा सही तरीके से सांस नहीं ले पाती और कुम्हलाई,सलवटेंदार नजर आने लगती है। गर्म पानी में हल्दी और थोड़ी सी फिटकरी घोलें,फिर भाप लें,त्वचा के बंद रोम छिद्र खुलने लगेंगे।
त्वचा का रूखापन दूर करने के लिए मलाई में थोडेे से दूध में घुली केसर डालकर अच्छी तरह फेंट लें। इसे त्वचा पर मलें,त्चचा चिकनी होने लगेगी।
चेहरे को चिकना बनाने के लिए पहाड़ी आलू पीसकर उसमें थोड़ा सा अनार का रस व दही मिलाकर लेप बना लें। इसे चेहरे पर मलें। 10 मिनट बाद चेहरा साफ कर लें।
इस ठंडे मौसम में त्वचा को स्निग्ध बनाए रखने के लिए स्नान के पानी में दो छोटे चम्मच सिरका मिला लें।
संतरे के छिलकों का पाउडर दो छोटे चम्मच,एक छोटा चम्मच आटा,एक छोटा चम्मच मलाई,एक छोटा चम्मच गुलाब जल और थोड़ा सा पानी मिलाकर उबटन बना लें। इसे चेहरे,गर्दन,हाथ-पैर पर मलें। कुछ देर बाद स्नान कर लें,त्वचा का सौंदर्य खिल उठेगा।
जाड़े में सांवले चेहरे का सौंदर्य निखारने के लिए शहद में गुलाब जल,पोदीना रस मिलाकर चेहरे पर मलें। पंद्रह मिनट बाद चेहरा साफ पानी से धो लें।
खट्टे संतरे के रस में समान मात्रा में शहद मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा सुकोमल होती है।
सर्दियों में खासकर हाथ-पैरों की सफाई से बेखबर न रहें। इसके लिए सप्ताह में एक बार पेडीक्योर व मैनीक्योर अवश्य करें। पैरों के नाखून को भी हमेशा काटकर ठीक आकार में रखें। इन दिनों सर्द मौसम के असर से नाखून कुछ कठोर हो जाते हैं। इसलिए उन पर नींबू व अनार का रस मलें। रात्रि में पोरों पर मलाई या कोल्ड क्रीम की मालिश करें।
सर्दियों में अंगुलियों में सूजन आ जाती है। चार छोटे चम्मच सरसों के तेल में एक छोटा चम्मच बारीक पिसा सेधा नमक मिलाकर गर्म करें तथा रात्रि में इसे अंगुलियों पर मलें। मोजे-दस्ताने पहनकर सोएं। सूजन मिट जाएगी।
यदि पैर फटने लगें तो उन्हें नमक युक्त गर्म पानी से धोकर अरंडी का तेल मलें। पैरों का फटना बंद होने लगेगा।
होठों,गालों पर गुलाबी रंगत पाने के लिए गुलाब के ताजा फूल,चिरौंजी पेस्ट और जायफल पाउडर को दूध में भिगोकर उसका पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर मलें। सूखने पर चेहरा धो लें। चेहरे पर व होठों पर गुलाबी आभा दमकने लगेगी।
चावल के आटे में दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। उबटन की तरह चेहरे पर मलें। चेहरे की त्वचा सुकोमल बनेगी।
सीताफल,संतरा,नींबू और सेब के छिलकों को पीसकर त्वचा पर मलें। त्वचा में सौंदर्य का जादू जगने लगेगा।
आटे में नारियल का तेल,चुटकी भर हल्दी,गुलाबजल,नींबू रस व पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे त्वचा पर मलें। स्नान के उपरांत रंग-रूप खिला-खिला दिखाई देगा।
Thursday, November 22, 2012
Wednesday, July 11, 2012
Wednesday, June 13, 2012
Tuesday, May 15, 2012
Sunday, April 29, 2012
Happy birthday
aye dost ye dua hai meri
soo saal tak tu rahe ,
rahe jamana bahar ka
happy birth day to u
dear friend
soo saal tak tu rahe ,
rahe jamana bahar ka
happy birth day to u
dear friend
Saturday, April 7, 2012
sukhi parivar ki neev
इस समय दो तरह के दाम्पत्य चल रहे हैं। पहला अशांत दाम्पत्य और दूसरा असंतुष्ट दाम्पत्य। जो पति-पत्नी ना समझ हैं उनके उपद्रव, खुद उनके सामने और दुनिया के आगे जाहिर हो जाते हैं। वे अपनी अशांति पर आवरण नहीं ओढ़ा पाते।
दूसरे वर्ण का दाम्पत्य वह है जिसमें पति-पत्नी थोड़े समझदार या कहें चालाक हैं, लिहाजा इस अशांति को ढंक लेते हैं, उपद्रव को खिसका भर देते हैं। ऐसा दाम्पत्य असंतुष्ट दाम्पत्य है। फिर ये असंतोष स्त्री या पुरुष दोनों को ही अपने-अपने गलत मार्ग पर जाने के लिए प्रोत्साहित कर देता है। जिन्हें सचमुच घर बसाना हो वे चमड़ी की तरह एक बात अपने से चिपका लें और वह है प्रेम।
बिना प्रेम के परिवार चलाया जा सकता है, बसाया नहीं जा सकता। इस समय ज्यादातर लोगों की गृहस्थी शोषण और उत्पीडऩ पर चल रही है। पति-पत्नी में से जो ज्यादा चालाक है वह इसे व्यवस्थित ढंग से करता है और जो कम समझदार है वह अव्यवस्थित तरीके से निपटा रहा है। मूल कृत्य में कोई अंतर नहीं है। प्रेम यदि आधार बनेगा तो जो पक्ष अधिक बुद्धिमान, समझदार होगा वह अपने जीवनसाथी को भी वैसा बनाने का प्रेमपूर्ण कृत्य करेगा। यही आपसी मुकाबला न होकर समान होने के सद्प्रयास होंगे।
गुण, कर्म और स्वभाव की समानता से जोड़े बन जाएं यह किस्मत की बात है। वरना अपनी समूची सहनशक्ति, उदारभाव और माधुर्य को अपने जीवनसाथी के साथ संबंधों में झोंक दें और इसके लिए जो ताकत लगती है उसके शक्ति संचय के लिए ये नौ दिन काम आएंगे। नामभर नवरात्र है, पर इसमें गजब का उजाला है।
दूसरे वर्ण का दाम्पत्य वह है जिसमें पति-पत्नी थोड़े समझदार या कहें चालाक हैं, लिहाजा इस अशांति को ढंक लेते हैं, उपद्रव को खिसका भर देते हैं। ऐसा दाम्पत्य असंतुष्ट दाम्पत्य है। फिर ये असंतोष स्त्री या पुरुष दोनों को ही अपने-अपने गलत मार्ग पर जाने के लिए प्रोत्साहित कर देता है। जिन्हें सचमुच घर बसाना हो वे चमड़ी की तरह एक बात अपने से चिपका लें और वह है प्रेम।
बिना प्रेम के परिवार चलाया जा सकता है, बसाया नहीं जा सकता। इस समय ज्यादातर लोगों की गृहस्थी शोषण और उत्पीडऩ पर चल रही है। पति-पत्नी में से जो ज्यादा चालाक है वह इसे व्यवस्थित ढंग से करता है और जो कम समझदार है वह अव्यवस्थित तरीके से निपटा रहा है। मूल कृत्य में कोई अंतर नहीं है। प्रेम यदि आधार बनेगा तो जो पक्ष अधिक बुद्धिमान, समझदार होगा वह अपने जीवनसाथी को भी वैसा बनाने का प्रेमपूर्ण कृत्य करेगा। यही आपसी मुकाबला न होकर समान होने के सद्प्रयास होंगे।
गुण, कर्म और स्वभाव की समानता से जोड़े बन जाएं यह किस्मत की बात है। वरना अपनी समूची सहनशक्ति, उदारभाव और माधुर्य को अपने जीवनसाथी के साथ संबंधों में झोंक दें और इसके लिए जो ताकत लगती है उसके शक्ति संचय के लिए ये नौ दिन काम आएंगे। नामभर नवरात्र है, पर इसमें गजब का उजाला है।
real story
जिंदगी में हर परेशानी से लडऩे के लिए सबसे पहले इंसान को जज्बे की जरुरत होती है। जिसमें लगन होती है वह हर परिस्थिति से जीत सकता है। ऐसे ही जिंदगी जीने का जज्बा सीखाने वाली एक कहानी है, नाचे मयूरी फिल्म से पहचान बनाने वाली अदाकारा सुधा चंद्रन की। सुधा आज टेलीविजन और फिल्मी दुनिया की जानी-मानी हस्ती है। बस दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया। आप में से बहुत सारे लोगों ने उन्हें सोनी टीवी के डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' में भी देखा होगा।
नाचे मयूरी फिल्म खुद सुधा के जीवन पर आधारित थी। वे उस समय की पहली अभिनेत्री थी। जिन्होंने अपने ही जीवन पर बनी फिल्म में अभिनय किया। सुधा ने सबसे पहले अपनी पहचान एक भरतनाट्यम डांसर के तौर पर बनाई। डांस को सुधा अपना जीवन मानती थी। लेकिन 1981 में हुई एक बस दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी थी। इस दुर्घटना के कारण उनका एक पैर काटना पड़ा। इस हादसे के बाद सुधा बुरी तरह निराश हुई उन्हें लगने लगा की जैसे सब खत्म हो गया है। लेकिन जब सुधा को जयपुर के एक अस्पताल में लगने वाले कत्रिम पैर के बारे में जानकारी मिली तो। डॉक्टर से बातचीत के बाद सुधा फिर से जिंदगी जीने के जज्बे से भर गई।
मेगजीन्स में सुधा की कहानी छपने लगी। तभी जाने-माने फिल्म निर्माता रामोजी राव की नजर उनकी कहानी पर पड़ी और उन्होंने 1984 में तेलुगू में मयूरी नाम की फिल्म बना डाली। उसके दो साल बाद ही रामोजी राव ने टी. रामाराव के निर्देशन में नाचे मयूरी हिन्दी में बनाई और फिर से डांसिंग करने की अपनी ललक और मेहनत से सुधा ने सब को अचंभित तो किया ही साथ ही इस फिल्म में अपने अभिनय से दर्शकों की आंखे भी नम कर दी।
नाचे मयूरी फिल्म खुद सुधा के जीवन पर आधारित थी। वे उस समय की पहली अभिनेत्री थी। जिन्होंने अपने ही जीवन पर बनी फिल्म में अभिनय किया। सुधा ने सबसे पहले अपनी पहचान एक भरतनाट्यम डांसर के तौर पर बनाई। डांस को सुधा अपना जीवन मानती थी। लेकिन 1981 में हुई एक बस दुर्घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी थी। इस दुर्घटना के कारण उनका एक पैर काटना पड़ा। इस हादसे के बाद सुधा बुरी तरह निराश हुई उन्हें लगने लगा की जैसे सब खत्म हो गया है। लेकिन जब सुधा को जयपुर के एक अस्पताल में लगने वाले कत्रिम पैर के बारे में जानकारी मिली तो। डॉक्टर से बातचीत के बाद सुधा फिर से जिंदगी जीने के जज्बे से भर गई।
मेगजीन्स में सुधा की कहानी छपने लगी। तभी जाने-माने फिल्म निर्माता रामोजी राव की नजर उनकी कहानी पर पड़ी और उन्होंने 1984 में तेलुगू में मयूरी नाम की फिल्म बना डाली। उसके दो साल बाद ही रामोजी राव ने टी. रामाराव के निर्देशन में नाचे मयूरी हिन्दी में बनाई और फिर से डांसिंग करने की अपनी ललक और मेहनत से सुधा ने सब को अचंभित तो किया ही साथ ही इस फिल्म में अपने अभिनय से दर्शकों की आंखे भी नम कर दी।
Monday, March 19, 2012
Subscribe to:
Comments (Atom)